तत्पश्चात् शत्रुओं का नाश करने वाले महाबाहु भीमसेन सर्पों द्वारा प्रदत्त दिव्य शय्या पर सुखपूर्वक सो गये।
Thereafter, the mighty-armed Bhimasena, the destroyer of enemies, slept comfortably on the celestial bed provided by the serpents.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि भीमसेनरसपाने सप्तविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें भीमसेनके रसपानसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)