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mahabharat 1.127.71: वह एक ही साँस में एक कुण्ड का रस पी जाता था। इस प्रकार महाबली पाण्डुपुत्र ने आठ कुण्डों का रस पी लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.127.71 
एकोच्छ्वासात् तत: कुण्डं पिबति स्म महाबल:।
एवमष्टौ स कुण्डानि ह्यपिबत् पाण्डुनन्दन:॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
वह एक ही साँस में एक कुण्ड का रस पी जाता था। इस प्रकार महाबली पाण्डुपुत्र ने आठ कुण्डों का रस पी लिया।
 
He would drink the juice of one kund (pot) in a single breath. In this way the mighty son of Pandu drank the juice of eight kunds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)