श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  1.127.70 
ततो भीमस्तदा नागै: कृतस्वस्त्ययन: शुचि:।
प्राङ्मुखश्चोपविष्टश्च रसं पिबति पाण्डव:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
तब सर्पों ने भीमसेन के लिए स्वस्तिवाचन किया। तब पाण्डुकुमार पवित्र होकर पूर्वाभिमुख होकर बैठ गए और तालाब का रस पीने लगे। 70॥
 
Then the serpents recited Swastiva for Bhimsen. Then Pandukumar became pure and sat facing east and started drinking the juice of the pond. 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)