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mahabharat 1.127.69: ‘इस बालक को उतना ही रस पिलाना चाहिए जितना यह पी सके।’ यह सुनकर वासुकि ने आर्यक नाग से कहा, ‘ऐसा ही हो।’॥69॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.127.69 
यावत् पिबति बालोऽयं तावदस्मै प्रदीयताम्।
एवमस्त्विति तं नागं वासुकि: प्रत्यभाषत॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
‘इस बालक को उतना ही रस पिलाना चाहिए जितना यह पी सके।’ यह सुनकर वासुकि ने आर्यक नाग से कहा, ‘ऐसा ही हो।’॥69॥
 
'This child should be given as much juice as he can drink.' On hearing this Vasuki said to Aryaka Naag, 'So be it.'॥ 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)