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mahabharat 1.127.68: जब आप संतुष्ट हो जाएं, तो यह महाबली राजकुमार आपकी आज्ञा से उस घड़े का रस पिए, जिसमें हजार हाथियों का बल है।   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.127.68 
रसं पिबेत् कुमारोऽयं त्वयि प्रीते महाबल:।
बलं नागसहस्रस्य यस्मिन् कुण्डे प्रतिष्ठितम्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
जब आप संतुष्ट हो जाएं, तो यह महाबली राजकुमार आपकी आज्ञा से उस घड़े का रस पिए, जिसमें हजार हाथियों का बल है।
 
‘When you are satisfied, this mighty prince should, by your permission, drink the juice of that pot, which gives the strength of a thousand elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)