श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  1.127.67 
एवमुक्तस्तदा नागो वासुकिं प्रत्यभाषत।
यदि नागेन्द्र तुष्टोऽसि किमस्य धनसंचयै:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर आर्यक नाग ने वासुकि से कहा - 'नागराज! यदि आप प्रसन्न हैं, तो इस धन का क्या करेंगे?'
 
On his saying this, the serpent Aryaka said to Vasuki - 'King of serpents! If you are happy, then what will you do with this money?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)