Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.127.63-66: तभी वासुकि उन सर्पों के साथ आए और उन्होंने महाबली और पराक्रमी भीमसेन को देखा। उसी समय सर्पराज आर्यक ने, जो पृथा के पिता शूरसेन के नाना थे, भी उन्हें देखा। उन्होंने अपने पौत्र को कसकर गले लगा लिया। प्रसिद्ध सर्पराज वासुकि भी भीमसेन से बहुत प्रसन्न हुए और बोले, 'उनका प्रिय कार्य कौन सा है? उन्हें धन, स्वर्ण और रत्न दान में देने चाहिए।'   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 63-66
 
 
श्लोक  1.127.63-66 
ततो वासुकिरभ्येत्य नागैरनुगतस्तदा॥ ६३॥
पश्यति स्म महाबाहुं भीमं भीमपराक्रमम्।
आर्यकेण च दृष्ट: स पृथाया आर्यकेण च॥ ६४॥
तदा दौहित्रदौहित्र: परिष्वक्त: सुपीडितम्।
सुप्रीतश्चाभवत् तस्य वासुकि: स महायशा:॥ ६५॥
अब्रवीत् तं च नागेन्द्र: किमस्य क्रियतां प्रियम्।
धनौघो रत्ननिचयो वसु चास्य प्रदीयताम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
तभी वासुकि उन सर्पों के साथ आए और उन्होंने महाबली और पराक्रमी भीमसेन को देखा। उसी समय सर्पराज आर्यक ने, जो पृथा के पिता शूरसेन के नाना थे, भी उन्हें देखा। उन्होंने अपने पौत्र को कसकर गले लगा लिया। प्रसिद्ध सर्पराज वासुकि भी भीमसेन से बहुत प्रसन्न हुए और बोले, 'उनका प्रिय कार्य कौन सा है? उन्हें धन, स्वर्ण और रत्न दान में देने चाहिए।'
 
Then Vasuki came with those serpents and saw the fiercely powerful and powerful Bhimasena. At the same time, the King of Serpents Aryaka, who was the maternal grandfather of Shurasena, the father of Pritha, also saw him. He hugged his grandson tightly. The famous King of Serpents Vasuki was also very pleased with Bhimasena and said, 'What is his favourite work that should be done? He should be gifted with wealth, gold and precious stones.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)