श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.127.6 
अतिक्रान्तसुखा: काला: पर्युपस्थितदारुणा:।
श्व: श्व: पापिष्ठदिवसा: पृथिवी गतयौवना॥ ६॥
 
 
अनुवाद
"माँ! अब सुख के दिन बीत चुके हैं। बहुत बुरा समय आने वाला है। बुरे दिन धीरे-धीरे आ रहे हैं। धरती की जवानी चली गई है।"
 
‘Mother! Now the happy days are over. Very terrible times are about to come. Bad days are coming gradually. The youth of the earth is gone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)