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mahabharat 1.127.59: तभी कुंतीपुत्र भीम जाग उठे। उन्होंने अपने सारे बंधन तोड़ दिए और उन सभी साँपों को पकड़कर ज़मीन पर पटक दिया। कई साँप डरकर भाग गए।   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.127.59 
तत: प्रबुद्ध: कौन्तेय: सर्वं संछिद्य बन्धनम्।
पोथयामास तान् सर्वान् केचिद् भीता: प्रदुद्रुवु:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
तभी कुंतीपुत्र भीम जाग उठे। उन्होंने अपने सारे बंधन तोड़ दिए और उन सभी साँपों को पकड़कर ज़मीन पर पटक दिया। कई साँप डरकर भाग गए।
 
Thereafter Kunti's son Bhima woke up. He broke all his bonds and caught all those snakes and threw them on the ground. Many snakes ran away in fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)