Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.127.57: उनके काटने से कालकूट नामक विष का प्रभाव नष्ट हो गया। सर्पों के चलायमान विष ने भस्म किये हुए अचल विष को परास्त कर दिया ॥57॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.127.57 
ततोऽस्य दश्यमानस्य तद् विषं कालकूटकम्।
हतं सर्पविषेणैव स्थावरं जङ्गमेन तु॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
उनके काटने से कालकूट नामक विष का प्रभाव नष्ट हो गया। सर्पों के चलायमान विष ने भस्म किये हुए अचल विष को परास्त कर दिया ॥57॥
 
By being bitten by them, the effect of the poison called Kalakuta was destroyed. The movable poison of the snakes defeated the immovable poison that had been consumed. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)