श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 55-56
 
 
श्लोक  1.127.55-56 
स नि:सङ्गो जलस्यान्तमथ वै पाण्डवोऽविशत्।
आक्रामन्नागभवने तदा नागकुमारकान्॥ ५५॥
तत: समेत्य बहुभिस्तदा नागैर्महाविषै:।
अदश्यत भृशं भीमो महादंष्ट्रैर्विषोल्बणै:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन अचेत अवस्था में जल में डूबकर नागलोक पहुँचे। उस समय अनेक नागकुमार उनके शरीर के नीचे कुचले गए। तत्पश्चात् अनेक विषैले सर्पों ने मिलकर अपने घातक विषयुक्त विशाल दाढ़ों से भीमसेन को डस लिया। 55-56.
 
Bhimsena reached the Nagaloka by drowning in the water in an unconscious state. At that time many Nagakumaras got crushed under his body. Then many highly poisonous snakes together bit Bhimsena with their huge fangs containing deadly poison. 55-56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)