श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.127.52 
वाहयित्वा कुमारांस्ताञ्जलक्रीडागतांस्तदा।
प्रमाणकोटॺां वासार्थी सुष्वापावाप्य तत् स्थलम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
जलक्रीड़ा करने आए बालकों को साथ लेकर वह विश्राम करने की इच्छा से उस घर में आया और वहीं एक स्थान पर सो गया ॥52॥
 
Taking along with him the boys who had come for water sports, he came to that house with the desire to take rest and slept there in one place. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)