श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  1.127.44-45 
अथोद्यानवरे तस्मिंस्तथा क्रीडागताश्च ते।
परस्परस्य वक्त्रेभ्यो ददुर्भक्ष्यांस्ततस्तत:॥ ४४॥
ततो दुर्योधन: पापस्तद्भक्ष्ये कालकूटकम्।
विषं प्रक्षेपयामास भीमसेनजिघांसया॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस सुन्दर उद्यान में क्रीड़ा करने आये कौरव और पाण्डव एक दूसरे के मुख में भोजन डालने लगे। उस समय पापी दुर्योधन ने भीमसेन को मारने की इच्छा से उनके भोजन में कालकूट नामक विष मिला दिया ॥44-45॥
 
Thereafter the Kauravas and the Pandavas, who had come to play in that beautiful garden, began to put food into each other's mouths. At that time the sinful Duryodhana, with the intention of killing Bhimasena, mixed poison called Kalakuta in his food. ॥ 44-45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)