श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.127.43 
तत्रोपविष्टास्ते सर्वे पाण्डवा: कौरवाश्च ह।
उपपन्नान् बहून् कामांस्ते भुञ्जन्ति ततस्तत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर सब कौरव और पाण्डव उचित स्थानों पर बैठ गए और स्वतः प्राप्त होने वाले नाना प्रकार के सुखों का भोग करने लगे ॥ 43॥
 
Reaching there all the Kauravas and Pandavas sat down at appropriate places and began enjoying the various types of pleasures that were automatically provided to them. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)