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mahabharat 1.127.36: आज हम लोग नाना प्रकार के उद्यानों और वनों से सुशोभित गंगाजी के तट पर चलें। वहाँ हम सब भाई मिलकर जल में डुबकी लगाएँगे।॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.127.36 
गङ्गां चैवानुयास्याम उद्यानवनशोभिताम्।
सहिता भ्रातर: सर्वे जलक्रीडामवाप्नुम:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
आज हम लोग नाना प्रकार के उद्यानों और वनों से सुशोभित गंगाजी के तट पर चलें। वहाँ हम सब भाई मिलकर जल में डुबकी लगाएँगे।॥ 36॥
 
‘Today let us go to the banks of river Ganga which is decorated with various gardens and forests. There all of us brothers will take a dip in the water together.’॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)