श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.127.34 
भक्ष्यं भोज्यं च पेयं च चोष्यं लेह्यमथापि च।
उपपादितं नरैस्तत्र कुशलै: सूदकर्मणि॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रसोई के काम में निपुण बहुत से लोग इकट्ठे हुए और उन्होंने अनेक खाद्य पदार्थ (दाक्ष्य1), भोज्य2, पेय3, चोष्य4 और लेह्य5 तैयार किये।
 
There, many people skilled in kitchen work gathered together and prepared many eatables (Dakshya1), Bhojya2, Drinks3, Choshya4 and Lehya5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)