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mahabharat 1.127.33: भारत! दुर्योधन ने गंगा तट पर स्थित प्रमाणकोटि तीर्थ में किसी स्थान पर जाकर इस सम्पूर्ण आयोजन का आयोजन किया था। उसने उस स्थान का नाम उदकक्रीडन रखा था। 33।   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.127.33 
उदकक्रीडनं नाम कारयामास भारत।
प्रमाणकोटॺां तं देशं स्थलं किंचिदुपेत्य ह॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भारत! दुर्योधन ने गंगा तट पर स्थित प्रमाणकोटि तीर्थ में किसी स्थान पर जाकर इस सम्पूर्ण आयोजन का आयोजन किया था। उसने उस स्थान का नाम उदकक्रीडन रखा था। 33।
 
Bharat! Duryodhan had organised this entire event by going to some place in the Pramanakoti Tirtha situated on the banks of the Ganges. He had named that place Udakkridan. 33.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)