श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.127.31 
ततो जलविहारार्थं कारयामास भारत।
चैलकम्बलवेश्मानि विचित्राणि महान्ति च॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय! तत्पश्चात् दुर्योधन ने गंगा के तट पर जलक्रीड़ा के लिए ऊनी और सूती वस्त्रों से बने विचित्र और विशाल घर बनवाये।
 
O Janamejaya! Thereafter Duryodhan got strange and huge houses made of woollen and cotton clothes prepared for water sports on the banks of the Ganges.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)