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mahabharat 1.127.28: वह न केवल बलवान और पराक्रमी है, अपितु महान पराक्रमी भी है। भीमसेन ही हम सबका मुकाबला कर सकता है॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.127.28 
प्राणवान् विक्रमी चैव शौर्येण महतान्वित:।
स्पर्धते चापि सहितानस्मानेको वृकोदर:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वह न केवल बलवान और पराक्रमी है, अपितु महान पराक्रमी भी है। भीमसेन ही हम सबका मुकाबला कर सकता है॥ 28॥
 
'He is not only strong and valiant, but also has great valour. Bhimasena alone can compete with all of us.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)