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mahabharat 1.127.27: वह अपने भाइयों के साथ विचार करने लगा कि 'यह मध्यम पाण्डुपुत्र कुन्तीपुत्र भीम समस्त बलवानों में सबसे बलवान है। इसे छल से पकड़कर पकड़ लेना चाहिए॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.127.27 
अयं बलवतां श्रेष्ठ: कुन्तीपुत्रो वृकोदर:।
मध्यम: पाण्डुपुत्राणां निकृत्या संनिगृह्यताम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वह अपने भाइयों के साथ विचार करने लगा कि 'यह मध्यम पाण्डुपुत्र कुन्तीपुत्र भीम समस्त बलवानों में सबसे बलवान है। इसे छल से पकड़कर पकड़ लेना चाहिए॥ 27॥
 
He began to think with his brothers that 'This middle son of Pandu, Kunti's son Bhima is the strongest among all the strong men. He should be deceived and captured.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)