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mahabharat 1.127.26: वह सदैव धर्म से विमुख रहकर पापकर्मों में ही लगा रहता था। मोह और धन के लोभ के कारण उसका मन पापमय विचारों से भर गया था॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.127.26 
तस्य धर्मादपेतस्य पापानि परिपश्यत:।
मोहादैश्वर्यलोभाच्च पापा मतिरजायत॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वह सदैव धर्म से विमुख रहकर पापकर्मों में ही लगा रहता था। मोह और धन के लोभ के कारण उसका मन पापमय विचारों से भर गया था॥ 26॥
 
He always stayed away from religion and focused on sinful acts. Due to the greed for attachment and wealth, his mind was filled with sinful thoughts.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)