श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.127.25 
ततो बलमतिख्यातं धार्तराष्ट्र: प्रतापवान्।
भीमसेनस्य तज्ज्ञात्वा दुष्टभावमदर्शयत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तब धृतराष्ट्रपुत्र महाप्रतापी दुर्योधन ने यह जानकर कि भीमसेन में अत्यन्त बल है, उनके प्रति द्वेष प्रकट करना आरम्भ कर दिया॥ 25॥
 
Then Duryodhana, the glorious son of Dhritarashtra, learning that Bhimasena possessed exceedingly great strength, began to show ill-will towards him.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)