श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.127.24 
एवं स धार्तराष्ट्रांश्च स्पर्धमानो वृकोदर:।
अप्रियेऽतिष्ठदत्यन्तं बाल्यान्न द्रोहचेतसा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार भीमसेन भी धृतराष्ट्र के पुत्रों के साथ स्पर्धा करते थे और उन कार्यों में लगे रहते थे जो उन्हें अत्यन्त अप्रिय थे; परन्तु कौरवों के प्रति उनके मन में कोई द्वेष नहीं था; वे केवल अपने बाल स्वभाव के कारण ऐसा करते थे॥ 24॥
 
Similarly, Bhimasena also used to compete with the sons of Dhritarashtra and used to remain engaged in activities which were most unpleasant to them. But he did not have any animosity towards the Kauravas in his heart; he used to do so only due to his childish nature.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)