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mahabharat 1.127.23: कुश्ती, दौड़ और विद्याभ्यास में धृतराष्ट्रपुत्र भीमसेन को सदैव डाँटने पर भी उनकी बराबरी नहीं कर पाता था॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.127.23 
न ते नियुद्धे न जवे न योग्यासु कदाचन।
कुमारा उत्तरं चक्रु: स्पर्धमाना वृकोदरम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कुश्ती, दौड़ और विद्याभ्यास में धृतराष्ट्रपुत्र भीमसेन को सदैव डाँटने पर भी उनकी बराबरी नहीं कर पाता था॥ 23॥
 
In wrestling, running and study, Dhritarashtra's son was never able to match Bhimasena in spite of always reprimanding him.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)