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mahabharat 1.127.2: उन्होंने समस्त कौरवों और हजारों श्रेष्ठ ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें रत्नों के ढेर और उत्तम ग्राम दिए॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.127.2 
कुरूंश्च विप्रमुख्यांश्च भोजयित्वा सहस्रश:।
रत्नौघान् विप्रमुख्येभ्यो दत्त्वा ग्रामवरांस्तथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने समस्त कौरवों और हजारों श्रेष्ठ ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें रत्नों के ढेर और उत्तम ग्राम दिए॥2॥
 
Having fed all the Kauravas and thousands of eminent Brahmins, He gave them heaps of gems and the finest villages.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)