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mahabharat 1.127.15: वह धृतराष्ट्र के पुत्रों के साथ सदा प्रसन्नतापूर्वक क्रीड़ा करता रहता था। अपनी प्रतिभा के कारण वह सब प्रकार की बालक्रीड़ाओं में निपुण था।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.127.15 
धार्तराष्ट्रैश्च सहिता: क्रीडन्तो मुदिता: सुखम्।
बालक्रीडासु सर्वासु विशिष्टास्तेजसाभवन्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह धृतराष्ट्र के पुत्रों के साथ सदा प्रसन्नतापूर्वक क्रीड़ा करता रहता था। अपनी प्रतिभा के कारण वह सब प्रकार की बालक्रीड़ाओं में निपुण था।॥15॥
 
He was always happy playing happily with the sons of Dhritarashtra. Due to his brilliance he excelled in all types of childish games.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)