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mahabharat 1.127.12: अम्बिका भी 'तथास्तु' कहकर उनके साथ जाने को तैयार हो गयी। जनमेजय! तब उत्तम व्रतों का पालन करने वाली सत्यवती भीष्म जी से पूछकर अपनी दोनों बहुओं के साथ वन में चली गयी।   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.127.12 
तथेत्युक्ता त्वम्बिकया भीष्ममामन्त्र्य सुव्रता।
वनं ययौ सत्यवती स्नुषाभ्यां सह भारत॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अम्बिका भी 'तथास्तु' कहकर उनके साथ जाने को तैयार हो गयी। जनमेजय! तब उत्तम व्रतों का पालन करने वाली सत्यवती भीष्म जी से पूछकर अपनी दोनों बहुओं के साथ वन में चली गयी।
 
Ambika too agreed to go with him saying 'Tathastu'. Janamejaya! Then Satyavati, who was the follower of the best vows, after asking Bhishma ji, went to the forest along with her two daughters-in-law.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)