श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.127.11 
तत् कौसल्यामिमामार्तां पुत्रशोकाभिपीडिताम्।
वनमादाय भद्रं ते गच्छामि यदि मन्यसे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'अतः यदि आप सहमत हों तो मैं इस दुःखी अम्बालिका को, जो अपने पुत्र के वियोग से दुःखी हो रही है, अपने साथ वन में ले जाऊँगा। आपका कल्याण हो।'॥11॥
 
'So if you agree, I will take this sad Ambalika along with me to the forest who is suffering from the grief of losing her son. May you be blessed.'॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)