Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.127.1: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! इसके बाद कुंती ने उस समय राजा धृतराष्ट्र और उनके भाइयों भीष्मजी के साथ मिलकर पांडु के लिए अमृत रूपी स्वधामय श्राद्ध किया। 1॥ | mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
तत: कुन्ती च राजा च भीष्मश्च सह बन्धुभि:।
ददु: श्राद्धं तदा पाण्डो: स्वधामृतमयं तदा॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! इसके बाद कुंती ने उस समय राजा धृतराष्ट्र और उनके भाइयों भीष्मजी के साथ मिलकर पांडु के लिए अमृत रूपी स्वधामय श्राद्ध किया। 1॥
Vaishampayanji says- Rajan! Thereafter, Kunti, along with King Dhritarashtra and his brothers, Bhishmaji, at that time, performed Swadhamay Shraddha in the form of nectar for Pandu. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥