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mahabharat 1.126.9: पाण्डुकी की अस्थियाँ माद्री सहित उसमें अच्छी तरह बाँधकर रखी गईं। उस शिबिका में, जो मनुष्यों द्वारा वहन की जाने वाली तथा सुशोभित थी, उनके सभी बंधु-बांधव माद्री सहित श्रेष्ठ मनुष्य पाण्डु की अस्थियाँ ले जाने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.126.9 
नृसिंहं नरयुक्तेन परमालंकृतेन तम्।
अवहन् यानमुख्येन सह माद्रॺा सुसंयतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुकी की अस्थियाँ माद्री सहित उसमें अच्छी तरह बाँधकर रखी गईं। उस शिबिका में, जो मनुष्यों द्वारा वहन की जाने वाली तथा सुशोभित थी, उनके सभी बंधु-बांधव माद्री सहित श्रेष्ठ मनुष्य पाण्डु की अस्थियाँ ले जाने लगे।
 
Panduki's bones were kept well tied along with Madri in it. Through that Shibika, which was carried by human beings and was well decorated, all their relatives and friends started carrying the bones of Pandu, the best human being, along with Madri. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)