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mahabharat 1.126.6: राजन! तत्पश्चात् शीघ्र ही पुरोहितगण पाण्डुक का अन्तिम संस्कार करने के लिए घी, गन्ध आदि अग्नि लेकर नगर से बाहर आ गये॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.126.6 
ततस्तु नगरात् तूर्णमाज्यगन्धपुरस्कृता:।
निर्हृता: पावका दीप्ता: पाण्डो राजन् पुरोहितै:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् शीघ्र ही पुरोहितगण पाण्डुक का अन्तिम संस्कार करने के लिए घी, गन्ध आदि अग्नि लेकर नगर से बाहर आ गये॥6॥
 
Rajan! Thereafter, soon the priests came out of the city carrying fire with ghee and fragrance etc. to perform the last rites of Panduka. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)