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mahabharat 1.126.4: निष्पाप राजा पाण्डु शोक का नहीं, प्रशंसनीय हैं, जिनके देवताओं के पुत्रों के समान पाँच पराक्रमी पुत्र हैं ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.126.4 
न शोच्य: पाण्डुरनघ: प्रशस्य: स नराधिप:।
यस्य पञ्च सुता वीरा जाता: सुरसुतोपमा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
निष्पाप राजा पाण्डु शोक का नहीं, प्रशंसनीय हैं, जिनके देवताओं के पुत्रों के समान पाँच पराक्रमी पुत्र हैं ॥4॥
 
The sinless king Pandu is not a cause for regret but rather a praiseworthy one, who has got five valiant sons like the sons of the gods. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)