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mahabharat 1.126.27: शान्तनुनन्दन भीष्म, परम बुद्धिमान विदुर और समस्त कौरव भी अत्यन्त दुःखी होकर रोने लगे॥27॥   |   mahabharat अध्याय 1.126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.126.27 
तथा भीष्म: शान्तनवो विदुरश्च महामति:।
सर्वश: कौरवाश्चैव प्राणदन् भृशदु:खिता:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
शान्तनुनन्दन भीष्म, परम बुद्धिमान विदुर और समस्त कौरव भी अत्यन्त दुःखी होकर रोने लगे॥27॥
 
Shantanunandan Bhishma, the most intelligent Vidur and all the Kauravas also became very sad and started crying. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)