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mahabharat 1.126.24: उस समय उन दोनों की हड्डियाँ देखकर माता कौशल्या (अम्बालिका) सहसा 'हे पुत्र! हे पुत्र!' कहकर भूमि पर मूर्छित हो गईं।   |   mahabharat अध्याय 1.126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.126.24 
ततस्तयो: शरीरे द्वे दृष्ट्वा मोहवशं गता।
हा हा पुत्रेति कौसल्या पपात सहसा भुवि॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस समय उन दोनों की हड्डियाँ देखकर माता कौशल्या (अम्बालिका) सहसा 'हे पुत्र! हे पुत्र!' कहकर भूमि पर मूर्छित हो गईं।
 
At that time, seeing the bones of both of them, mother Kausalya (Ambalika) suddenly fell unconscious on the ground saying, 'Oh son! Oh son!'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)