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mahabharat 1.126.15: वे कहते रहे कि, ‘हाय! ये महाराज हमें छोड़कर, सदा के लिए महान दुःख में डालकर और हम सबको अनाथ बनाकर कहाँ जा रहे हैं?’॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.126.15 
अयमस्मानपाहाय दु:खे चाधाय शाश्वते।
कृत्वा चास्माननाथांश्च क्व यास्यति नराधिप:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वे कहते रहे कि, ‘हाय! ये महाराज हमें छोड़कर, सदा के लिए महान दुःख में डालकर और हम सबको अनाथ बनाकर कहाँ जा रहे हैं?’॥15॥
 
They kept on saying, 'Alas! Where is this Maharaj going, leaving us, putting us into great misery forever and making us all orphans?'॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)