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mahabharat 1.125.5-6: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! इस प्रकार परस्पर परामर्श करके उन देवतुल्य, उदार और बुद्धिमान सिद्ध महर्षियों ने पाण्डवों को भीष्म और धृतराष्ट्र के हाथों में सौंपने के लिए पाण्डुपुत्रों को आगे करके हस्तिनापुर नगरी में जाने का निश्चय किया।   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  1.125.5-6 
वैशम्पायन उवाच
ते परस्परमामन्त्र्य देवकल्पा महर्षय:।
पाण्डो: पुत्रान् पुरस्कृत्य नगरं नागसाह्वयम्॥ ५॥
उदारमनस: सिद्धा गमने चक्रिरे मन:।
भीष्माय पाण्डवान् दातुं धृतराष्ट्राय चैव हि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! इस प्रकार परस्पर परामर्श करके उन देवतुल्य, उदार और बुद्धिमान सिद्ध महर्षियों ने पाण्डवों को भीष्म और धृतराष्ट्र के हाथों में सौंपने के लिए पाण्डुपुत्रों को आगे करके हस्तिनापुर नगरी में जाने का निश्चय किया।
 
Vaishampayanji says- Rajan! In this way, after consulting each other, those godlike, generous and intelligent Siddha Maharishis decided to go to the city of Hastinapur with the sons of Pandu in front to hand over the Pandavas to Bhishma and Dhritarashtra. 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)