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mahabharat 1.125.4: उनके इन पुत्रों, पाण्डु और माद्री की अस्थियों तथा उन महाबली राजा की रानी कुन्ती को लेकर हम उनकी राजधानी में चलें। इस समय हमारा यही एकमात्र धर्म प्रतीत होता है॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.125.4 
तस्येमानात्मजान् देहं भार्यां च सुमहात्मन:।
स्वराष्ट्रं गृह्य गच्छामो धर्म एष हि न: स्मृत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उनके इन पुत्रों, पाण्डु और माद्री की अस्थियों तथा उन महाबली राजा की रानी कुन्ती को लेकर हम उनकी राजधानी में चलें। इस समय हमारा यही एकमात्र धर्म प्रतीत होता है॥4॥
 
Taking these sons of his, the bones of Pandu and Madri, and Kunti, the queen of that great king, let us go to his capital. This seems to be the only dharma for us at this time. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)