Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.125.35-d5: महर्षियों और सिद्धों के समूह को इस प्रकार गन्धर्वों के नगर के समान अदृश्य होते देख, सब कौरव सहसा उछल पड़े और “साधु-साधु” कहते हुए अत्यन्त विस्मित हो गए ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना  »  श्लोक 35-d5
 
 
श्लोक  1.125.35-d5 
गन्धर्वनगराकारं तथैवान्तर्हितं पुन:।
ऋषिसिद्धगणं दृष्ट्वा विस्मयं ते परं ययु:॥ ३५॥
(कौरवा: सहसोत्पत्य साधु साध्विति विस्मिता:॥ )
 
 
अनुवाद
महर्षियों और सिद्धों के समूह को इस प्रकार गन्धर्वों के नगर के समान अदृश्य होते देख, सब कौरव सहसा उछल पड़े और “साधु-साधु” कहते हुए अत्यन्त विस्मित हो गए ॥35॥
 
Seeing the group of great sages and Siddhas disappear in this manner, like the city of Gandharvas, all the Kauravas suddenly jumped up and started saying, "Sadhu-sadhu", were very astonished. ॥ 35॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि ऋषिसंवादे पञ्चविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें ऋषिसंवादविषयक एक सौ पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२५॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३९ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)