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mahabharat 1.125.34: वैशम्पायनजी कहते हैं - 'जनमेजय! समस्त कौरवों से ऐसा कहकर उनके देखते ही देखते गुह्यकों सहित समस्त तपस्वी ऋषिगण क्षण भर में वहाँ से अदृश्य हो गये।   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.125.34 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा कुरून् सर्वान् कुरूणामेव पश्यताम्।
क्षणेनान्तर्हिता: सर्वे तापसा गुह्यकै: सह॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'जनमेजय! समस्त कौरवों से ऐसा कहकर उनके देखते ही देखते गुह्यकों सहित समस्त तपस्वी ऋषिगण क्षण भर में वहाँ से अदृश्य हो गये।
 
Vaishmpayana says - 'Janamejaya! Having said this to all the Kauravas, in front of their very eyes all the ascetic sages along with the Guhyakas disappeared from there in a moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)