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mahabharat 1.125.33: ‘सपिण्डीकरण के पश्चात् प्रेतकर्म समाप्त हो जाने पर, कुरुवंश के महापुरुष और समस्त धर्मों के ज्ञाता पाण्डु के पितृमेध (यज्ञ) का भी लाभ प्राप्त करना चाहिए।’ 33॥   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.125.33 
प्रेतकार्ये निवृत्ते तु पितृमेधं महायशा:।
लभतां सर्वधर्मज्ञ: पाण्डु: कुरुकुलोद्वह:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘सपिण्डीकरण के पश्चात् प्रेतकर्म समाप्त हो जाने पर, कुरुवंश के महापुरुष और समस्त धर्मों के ज्ञाता पाण्डु के पितृमेध (यज्ञ) का भी लाभ प्राप्त करना चाहिए।’ 33॥
 
'After the ghostly work is over after Sapindikarana, one should also get the benefit of Pitramedha (sacrifice) of Pandu, the great man of Kuru dynasty and the expert of all religions.' 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)