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mahabharat 1.125.30: जब उन्हें चिता पर लिटाकर अग्नि में होम दिया गया, तो देवी माद्री ने जीवन के प्रति अपनी आसक्ति त्याग दी और उसी अग्नि में प्रवेश कर गईं।   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.125.30 
तं चितागतमाज्ञाय वैश्वानरमुखे हुतम्।
प्रविष्टा पावकं माद्री हित्वा जीवितमात्मन:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब उन्हें चिता पर लिटाकर अग्नि में होम दिया गया, तो देवी माद्री ने जीवन के प्रति अपनी आसक्ति त्याग दी और उसी अग्नि में प्रवेश कर गईं।
 
When he was laid on the funeral pyre and sacrificed into the fire, Goddess Madri gave up her attachment to life and entered the same fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)