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mahabharat 1.125.25: 'यह तीसरा पुत्र धनंजय है, जो इन्द्र के अंश से कुन्ती के गर्भ से उत्पन्न हुआ है। इसकी कीर्ति से सभी बड़े-बड़े धनुर्धर इसका तिरस्कार करेंगे। 25॥   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.125.25 
पुरुहूतादयं जज्ञे कुन्त्यामेव धनंजय:।
यस्य कीर्तिर्महेष्वासान् सर्वानभिभविष्यति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'यह तीसरा पुत्र धनंजय है, जो इन्द्र के अंश से कुन्ती के गर्भ से उत्पन्न हुआ है। इसकी कीर्ति से सभी बड़े-बड़े धनुर्धर इसका तिरस्कार करेंगे। 25॥
 
'This third son is Dhananjay, who was born from the womb of Kunti from the part of Indra. Its fame will make all the great archers despise it. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)