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mahabharat 1.125.20-21: राजन! वहाँ एकत्रित हुए और शान्त बैठे हुए सब लोगों को देखकर भीष्मजी ने जल आदि से सब ऋषियों का पूजन किया और उनसे अपने राज्य और राष्ट्र का कुशल-क्षेम कहा। तब उन ऋषियों में जो सबसे वृद्ध थे, जटाधारी और मृगचर्मधारी ऋषिगण अन्य सब ऋषियों से अनुमति लेकर इस प्रकार बोले-॥20-21॥   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  1.125.20-21 
तमकूजमभिज्ञाय जनौघं सर्वशस्तदा।
पूजयित्वा यथान्यायं पाद्येनार्घ्येण च प्रभो॥ २०॥
भीष्मो राज्यं च राष्ट्रं च महर्षिभ्यो न्यवेदयत्।
तेषामथो वृद्धतम: प्रत्युत्थाय जटाजिनी।
ऋषीणां मतमाज्ञाय महर्षिरिदमब्रवीत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजन! वहाँ एकत्रित हुए और शान्त बैठे हुए सब लोगों को देखकर भीष्मजी ने जल आदि से सब ऋषियों का पूजन किया और उनसे अपने राज्य और राष्ट्र का कुशल-क्षेम कहा। तब उन ऋषियों में जो सबसे वृद्ध थे, जटाधारी और मृगचर्मधारी ऋषिगण अन्य सब ऋषियों से अनुमति लेकर इस प्रकार बोले-॥20-21॥
 
King! Seeing all the people gathered there and sitting quietly, Bhishmaji worshipped all the sages with water and water etc. and told them about the well-being of his kingdom and nation. Then the sage who was the oldest among those sages, wearing matted hair and deerskin, took permission from all the other sages and spoke thus -॥20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)