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mahabharat 1.125.2: तपस्वी ने कहा: महान और प्रतापी राजा पाण्डु ने अपना राज्य और राष्ट्र त्याग दिया था और तपस्वी ऋषियों के संरक्षण में इस स्थान पर रहकर तपस्या की थी।   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.125.2 
तापसा ऊचु:
हित्वा राज्यं च राष्ट्रं च स महात्मा महायशा:।
अस्मिन् स्थाने तपस्तप्त्वा तापसाञ्शरणं गत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तपस्वी ने कहा: महान और प्रतापी राजा पाण्डु ने अपना राज्य और राष्ट्र त्याग दिया था और तपस्वी ऋषियों के संरक्षण में इस स्थान पर रहकर तपस्या की थी।
 
The ascetic said: The great and glorious King Pandu had left his kingdom and nation and lived in this place under the protection of ascetic sages, practising penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)