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mahabharat 1.125.14: शूद्रों और वैश्यों की एक विशाल सभा हुई। किसी के मन में ईर्ष्या का भाव नहीं था। सबका मन धर्म में लगा हुआ था॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 125: ऋषियोंका कुन्ती और पाण्डवोंको लेकर हस्तिनापुर जाना और उन्हें भीष्म आदिके हाथों सौंपना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.125.14 
तथा विट्शूद्रसङ्घानां महान् व्यतिकरोऽभवत्।
न कश्चिदकरोदीर्ष्यामभवन् धर्मबुद्धय:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
शूद्रों और वैश्यों की एक विशाल सभा हुई। किसी के मन में ईर्ष्या का भाव नहीं था। सबका मन धर्म में लगा हुआ था॥14॥
 
A huge gathering of the Shudras and Vaishyas was held. No one had any feeling of jealousy in their hearts. Everyone's mind was focused on religion.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)