निष्पाप युधिष्ठिर ने अपने भाइयों सहित नवीन वस्त्र धारण करके पुरोहित की आज्ञा के अनुसार जलांजलि का कार्य पूर्ण किया। शतश्रृंग निवासी तपस्वी ऋषियों और भाटों ने पूज्य राजा पाण्डु के परलोक-सम्बन्धी समस्त कार्य विधिपूर्वक सम्पन्न किये।
Sinless Yudhishthir along with his brothers donned new clothes and completed the task of offering Jalanjali as per the orders of the priest. The ascetic sages and bards resident of Shatshringa completed all the work related to the afterlife of the respected King Pandu in a proper manner.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि पाण्डूपरमे चतुर्विंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें पाण्डुके परलोकगमनविषयक एक सौ चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२४॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५० १/२ श्लोक मिलाकर कुल ८१ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥