Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.124.d39-d41: माद्री बोली - बच्चों! कुन्तीदेवी तुम सबकी असली माता हैं, मैं तो केवल धाय थी। तुम्हारे पिता का देहांत हो चुका है। अब बड़े भाई युधिष्ठिर ही धर्म से तुम चारों भाइयों के पिता हैं। तुम सब को अपने गुरुजनों और गुरुजनों की सेवा में लगे रहना चाहिए और सत्य व धर्म के पालन से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। ऐसा करने वाले मनुष्य कभी नष्ट नहीं होते और न ही कभी पराजित होते हैं। अतः तुम सब भाइयों को आलस्य त्यागकर अपने गुरुजनों की सेवा में तत्पर रहना चाहिए। | mahabharat अध्याय 1.124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माद्रॺुवाच
कुन्ती माता अहं धात्री युष्माकं तु पिता मृत:।
युधिष्ठिर: पिता ज्येष्ठश्चतुर्णां धर्मत: सदा॥
वृद्धानुशासने सक्ता: सत्यधर्मपरायणा:।
तादृशा न विनश्यन्ति नैव यान्ति पराभवम्॥
तस्मात् सर्वे कुरुध्वं वै गुरुवृत्तिमतन्द्रिता:॥
अनुवाद
माद्री बोली - बच्चों! कुन्तीदेवी तुम सबकी असली माता हैं, मैं तो केवल धाय थी। तुम्हारे पिता का देहांत हो चुका है। अब बड़े भाई युधिष्ठिर ही धर्म से तुम चारों भाइयों के पिता हैं। तुम सब को अपने गुरुजनों और गुरुजनों की सेवा में लगे रहना चाहिए और सत्य व धर्म के पालन से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। ऐसा करने वाले मनुष्य कभी नष्ट नहीं होते और न ही कभी पराजित होते हैं। अतः तुम सब भाइयों को आलस्य त्यागकर अपने गुरुजनों की सेवा में तत्पर रहना चाहिए।
Madri said - Children! Kuntidevi is the real mother of all of you, I was only a wet nurse. Your father has died. Now elder brother Yudhishthira is the father of you four brothers by religion. All of you should remain engaged in serving the elders and teachers and never turn away from following truth and religion. People who do this are never destroyed and never get defeated. Therefore, all of you brothers should leave laziness and remain ready to serve your teachers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥