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mahabharat 1.124.d32-d35: माद्री बोली—कुंतीदेवी समस्त पुत्रों का कल्याण करने में समर्थ हैं। कोई भी स्त्री, चाहे वह अरुन्धती ही क्यों न हो, बुद्धि में उनकी बराबरी नहीं कर सकती। वृष्णिवंश के लोग और महाराज कुन्तिभोज भी कुनती के रक्षक और सहायक हैं। बहन! मुझमें आपके समान अपने पुत्रों का पालन करने की क्षमता नहीं है। अतः मैं अपने पति के साथ जाना चाहती हूँ। मैं अपने पति के सुख से संतुष्ट नहीं हूँ। अतः हे महारानी, ​​मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ कि आप मुझे अपने पतिलोक जाने की अनुमति दें। वहाँ मैं अपने पति के चरणों की सेवा करूँगी, जो धर्म के ज्ञाता, कृतज्ञ, सत्यवादी और बुद्धिमान हैं। आर्य! कृपया मेरी इस इच्छा को स्वीकार करें।   |   mahabharat अध्याय 1.124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण  »  श्लोक d32-d35
 
 
श्लोक  1.124.d32-d35 
माद्रॺुवाच
कुन्ती समर्था पुत्राणां योगक्षेमस्य धारणे।
अस्या हि न समा बुद्धॺा यद्यपि स्यादरुन्धती॥
कुन्त्याश्च वृष्णयो नाथा: कुन्तिभोजस्तथैव च।
नाहं त्वमिव पुत्राणां समर्था धारणे तथा॥
साहं भर्तारमन्वेष्ये अतृप्ता नन्वहं तथा।
भर्तृलोकस्य तु ज्येष्ठा देवी मामनुमन्यताम्॥
धर्मज्ञस्य कृतज्ञस्य सत्यधर्मस्य धीमत:।
पादौ परिचरिष्यामि तदार्ये ह्यनुमन्यताम्॥
 
 
अनुवाद
माद्री बोली—कुंतीदेवी समस्त पुत्रों का कल्याण करने में समर्थ हैं। कोई भी स्त्री, चाहे वह अरुन्धती ही क्यों न हो, बुद्धि में उनकी बराबरी नहीं कर सकती। वृष्णिवंश के लोग और महाराज कुन्तिभोज भी कुनती के रक्षक और सहायक हैं। बहन! मुझमें आपके समान अपने पुत्रों का पालन करने की क्षमता नहीं है। अतः मैं अपने पति के साथ जाना चाहती हूँ। मैं अपने पति के सुख से संतुष्ट नहीं हूँ। अतः हे महारानी, ​​मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ कि आप मुझे अपने पतिलोक जाने की अनुमति दें। वहाँ मैं अपने पति के चरणों की सेवा करूँगी, जो धर्म के ज्ञाता, कृतज्ञ, सत्यवादी और बुद्धिमान हैं। आर्य! कृपया मेरी इस इच्छा को स्वीकार करें।
 
Madri said—Kuntidevi is capable of looking after the welfare of all the sons. No woman, even if it is Arundhati, can match her in intelligence. The people of Vrishni clan and Maharaj Kuntibhoja are also Kunti's protectors and helpers. Sister! I do not have the ability to look after my sons like you have. Therefore, I want to follow my husband. I am not satisfied with the happiness of my husband's company. Therefore, I request you, the great queen, to allow me to go to my husband's world. There, I will serve the feet of my husband who is knowledgeable about Dharma, grateful, truthful and intelligent. Arya! Please approve this wish of mine.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)