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mahabharat 1.124.d1-2: एक समय, बुद्धिमान अर्जुन का चौदहवाँ वर्ष पूर्ण हो गया। उनके जन्मोत्सव पर, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में, ब्राह्मणों ने शुभ मंत्रों का पाठ आरम्भ किया। उस समय कुन्तीदेवी राजा पाण्डु का ध्यान रखना भूल गईं। वे ब्राह्मणों को भोजन कराने में व्यस्त हो गईं। वे स्वयं पुरोहित के साथ उन्हें भोजन कराने लगीं। उस समय कामातुर पाण्डु ने माद्री को बुलाकर अपने साथ ले लिया। उस समय चैत्र और वैशाख मास का संधिकाल था। सारा वन नाना प्रकार के सुन्दर पुष्पों से सुशोभित था और अपनी अनुपम शोभा से समस्त प्राणियों को मोहित कर रहा था। राजा पाण्डु अपनी छोटी रानी के साथ वन में विचरण करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण  »  श्लोक d1-2
 
 
श्लोक  1.124.d1-2 
(पूर्णे चतुर्दशे वर्षे फाल्गुनस्य च धीमत:।
तदा उत्तरफल्गुन्यां प्रवृत्ते स्वस्तिवाचने॥
रक्षणे विस्मृता कुन्ती व्यग्रा ब्राह्मणभोजने।
पुरोहितेन सहिता ब्राह्मणान् पर्यवेषयत्॥
तस्मिन् काले समाहूय माद्रीं मदनमोहित:।)
सुपुष्पितवने काले कदाचिन्मधुमाधवे।
भूतसम्मोहने राजा सभार्यो व्यचरद् वनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
एक समय, बुद्धिमान अर्जुन का चौदहवाँ वर्ष पूर्ण हो गया। उनके जन्मोत्सव पर, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में, ब्राह्मणों ने शुभ मंत्रों का पाठ आरम्भ किया। उस समय कुन्तीदेवी राजा पाण्डु का ध्यान रखना भूल गईं। वे ब्राह्मणों को भोजन कराने में व्यस्त हो गईं। वे स्वयं पुरोहित के साथ उन्हें भोजन कराने लगीं। उस समय कामातुर पाण्डु ने माद्री को बुलाकर अपने साथ ले लिया। उस समय चैत्र और वैशाख मास का संधिकाल था। सारा वन नाना प्रकार के सुन्दर पुष्पों से सुशोभित था और अपनी अनुपम शोभा से समस्त प्राणियों को मोहित कर रहा था। राजा पाण्डु अपनी छोटी रानी के साथ वन में विचरण करने लगे।
 
Once, the fourteenth year of the wise Arjun was completed. On his birth anniversary, in the Uttaraphalguni constellation, the Brahmins started reciting the auspicious mantras. At that time Kuntidevi forgot to take care of King Pandu. She got busy in feeding the Brahmins. She herself started serving food to them along with the priest. At that time, the lustful Pandu called Madri and took her with him. At that time, it was the time of the junction of the months of Chaitra and Vaisakha. The entire forest was decorated with various kinds of beautiful flowers and was captivating all the creatures with its unique beauty. King Pandu started wandering in the forest with his younger queen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)