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रहस्येकां तु तां दृष्ट्वा राजा राजीवलोचनाम्।
न शशाक नियन्तुं तं कामं कामवशीकृत:॥ ७॥
अनुवाद
कमल-नेत्र माद्री को एकांत स्थान पर अकेली देखकर राजा अपनी काम-शक्ति का प्रतिरोध न कर सका; वह पूर्णतः प्रेम के देवता के समक्ष समर्पित हो गया।
Seeing the lotus-eyed Madri alone in a secluded place, the king was unable to resist the force of his lust; he completely surrendered to the god of love. 7
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥