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mahabharat 1.124.7: कमल-नेत्र माद्री को एकांत स्थान पर अकेली देखकर राजा अपनी काम-शक्ति का प्रतिरोध न कर सका; वह पूर्णतः प्रेम के देवता के समक्ष समर्पित हो गया।   |   mahabharat अध्याय 1.124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.124.7 
रहस्येकां तु तां दृष्ट्वा राजा राजीवलोचनाम्।
न शशाक नियन्तुं तं कामं कामवशीकृत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
कमल-नेत्र माद्री को एकांत स्थान पर अकेली देखकर राजा अपनी काम-शक्ति का प्रतिरोध न कर सका; वह पूर्णतः प्रेम के देवता के समक्ष समर्पित हो गया।
 
Seeing the lotus-eyed Madri alone in a secluded place, the king was unable to resist the force of his lust; he completely surrendered to the god of love. 7
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)